लाइफ लाइन एक्सप्रेस, यानि
चलता-फिरता अस्पताल। यह दुनिया की ऐसी पहली ट्रेन है, जिसमें अस्पताल है औऱ कई
असाध्य रोगों की सर्जारी भी की जाती है।
इस ट्रेन को 1991 में शुरु
किया था और तब से देश के कोने-कोने में पहुंचकर लोगों का इलाज जारी है। इस ट्रेन
में ऑपरेशन से लेकर हर प्रकार के इलाज की सुविधाएं हैं। इसलिए इसे हॉस्पीटल ऑन
व्हील कहा जाता है।
यह है इस ट्रेन में
-दो सर्जीकल ऑपरेशन थियेटर,
जिसमें पोलियो से लेकर कटे होठों और मोतियाबिंद जैसे ऑपरेशन किए जाते हैं।
-ऑपरेशन थियेटर में पांच टेबल
हैं, जो आधुनिक मेडिकल उपकरणों से जुड़ी हैं।
-ट्रेन में दो रिकवरी रूम
हैं, जिसमें ऑपरेशन के बाद मरीजों को रखा जाता है।
-ऑपरेशन थियेटर में इलाज के
लिए अल्ट्रा मार्डन माइक्रोस्कोप से लेकर लेबोरेटरी, एक्सरे यूनिट भी है।
-ट्रेन में डेंटल रूम,
ऑप्थेलोलॉजी ट्रीटमेंट से लेकर मेडिकल स्टाफ के लिए रूम बने हुए हैं।
-लाइफ लाइन एक्सप्रेस का खुद
का पावर हाउस है, जो पूरी ट्रेन को बिजली सप्लाई करता है।
-सीसीटीवी कैमरे पूरी ट्रेन
में हैं, जिससे पूरी मॉनीटरिंग कंट्रोलरूम में बैठकर की जा सकती है।
एक लाख से ज्यादा सर्जरी हुई
इस ट्रेन में
-लाइफ लाइन एक्सप्रेस का सफर
1991 से जारी है और अभी तक यह 90 हजार किमी से ज्यादा की दूरी तय कर चुकी है।
- 90 हजार मरीजों का इलाज इस
ट्रेन के अस्पताल में हो चुका है औऱ एक लाख से ज्यादा सर्जरी हो चुकी हैं।
ऐसे इलाज होता है इस ट्रेन से
-जिस शहर में यह ट्रेन जाती
है, वहां स्थानीय प्रशासन व गैर सरकारी संगठन के सहयोग से मरीजों का रजिस्ट्रेशन
होता है और उसके बाद इलाज किया जाता है।
- ट्रेन पूरे एक हफ्ते तक
रुककर मरीजों का इलाज करती है। यदि किसी मरीज का इलाज संभव नहीं है तो उसे दूसरे
अस्पताल में रैफर किया जाता है।
कई देशों ने अपनाया इस ट्रेन
को
-केवल भारत में नहीं, बल्कि
चीन, यूरोप के अलावा पड़ोसी बांग्लादेश जैसे देशों ने इस चलते-फिरते अस्पताल को
पसंद किया है।

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