Thursday, 13 October 2016

ग्लोबल हंगर इंडेक्स

अलग-अलग देशों में लोगों को खाने की चीज़ें कैसी और कितनी मिलती हैं ग्लोबल हंगर इंडेक्स उसे दिखाने का साधन है. 'ग्लोबल हंगर इंडेक्स' का सूचकांक हर साल ताज़ा आंकड़ों के साथ जारी किया जाता है. इस सूचकांक के ज़रिए विश्व भर में भूख के ख़िलाफ़ चल रहे अभियान की उपलब्धियों और नाकामियों को दर्शाया जाता है.
ग्लोबल इंडेक्स स्कोर' ज़्यादा होने का मतलब है उस देश में भूख की समस्या अधिक है. उसी तरह किसी देश का स्कोर अगर कम होता है तो उसका मतलब है कि वहाँ स्थिति बेहतर है.

इसे नापने के चार मुख्य पैमाने हैं - कुपोषण, शिशुओं में भयंकर कुपोषण, बच्चों के विकास में रुकावट और बाल मृत्यु दर.
118 देशों की सूची में भारत 97वें स्थान पर है जबकि पकिस्तान 107 वें स्थान पर है. रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में 39 प्रतिशत बच्चे अविकसित हैं जबकी आबादी का 15.2 प्रतिशत हिस्सा कुपोषण का शिकार हैं. इस सूचकांक में भारत का स्कोर 28.5 है. जो विकासशील देशों की तुलना में काफी अधिक है. सूचकांक में विकासशील देशों का औसत स्कोर 21.3 है.यह रिपोर्ट इस मंगलवार को जाहिर हुई।

भारत के दूसरे पड़ोसियों की स्थिति बेहतर है जो इस इंडेक्स में ऊपर हैं. मिसाल के तौर पर नेपाल 72वें नंबर है जबकि म्यांमार 75वें, श्रीलंका 84वें और बांग्लादेश 90वें स्थान पर है.
एक रिपोर्ट के मुताबिक तो ये भी कहा गया है कि भारत में जितना खाना सालाना बर्बाद होता है उतना तो यूरोप ऊगा भी नही पाता।
भारत में ज़्यादा खाना तो आयात निर्यात में ही खराब हो जाते है।
चीन इस मामले में भारत से काफी बेहतार है। आज उन लोगों को ज़रुरत है एक सख्त कदम उठाने की जो लोग खुद तो आराम से अपना मनपसंद खाना खाते पर उन्ही के घर के बहार जो लोग भीख मांग रहे होते हैं उन्हें अपना बचा हुआ खाना भी नहीं देते।अगर हर इंसान इंसानियत के नाते अपन अकर्तव्य पूरा करेगा तो इस देश को सुपर पावर बनने से कोई रोक नहीं सकता।

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