Friday, 7 October 2016

सर्जिकल स्ट्राइक



हमारे देश में यह मुद्दा आजकल एक बड़ा विषय बना हुआ है।सर्जिकल स्ट्राइक्स की ख़बरें जब मीडिया में आयी तभी से जैसे एक हरकम्प सा मच गया है।हमारे देश के आम नागरिक तोह इस कारण बहुत खुश है क्योंकि पाकिस्तान को अपनी करनी का सही फल मिला।पाकिस्तान ने जिन आतंकवादियों को पाल रखा है उसने हमारे देश पर नज़र डालने की कोशिश की जिसके फल स्वरुप हमारे देश के बहादुर और वीर सैनिकों ने सर्जिकल स्ट्राइक्स के द्वारा उन्हें मज़ा चखाया।हमारे देश के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र दामोदर दस मोदी और हमारे देश के वीर सैनिकों को जहाँ एक तरफ बधाई दी गयी वहीँ दूसरी तरफ कुछ लोग (जिनके बारे में आप सब अच्छे से जानते हैं) हमारे सरकार  और सेना से सर्जिकल स्ट्राइक्स के सुबूत मांग रहें हैं।शायाद उन पढ़े लिखे बुद्धिजीवइयों को यह  नहीं पता की कोई भी देश अगर सर्जिकल  स्ट्राइक करता है तोह उससे जूड़ी खुफियां जानकारी  लीक नहीं की जाती।कभी कभी तो कई वर्ष बीतने के बाद भी लोगों को यह पता  नहीं  चलता की सर्जिकल स्ट्राइक में जो जवान शामिल हुए वो कौन थे।और दूसरी तरफ देखा जाए तो हमारे देश में जो लोग अपनी कला के कारण मशहूर हैं जैसे "सलमान खान", हम सब इस नाम से परिचित है इन्होंने कहा कि बॉलीवुड किसी के बाप का नहीं है है तो सलमान भाई हमें एक बात बताये वो फुटपाथ और जंगल आपके बाप की थी।महेश भट्ट साहब कहते हैं कला सीमाओं से बढ़कर है यानी इसका तो अभी यही मतलब निकाला जाएगा कि आपके लिए आपका कला  (यानी फिल्म इंडस्ट्री और पैसे) देश से बढ़कर हैं अरे आपको तो उस फवाद खान से सीखना चाहिए कमसे कम उसने अपने देश को तो सबसे ऊपर रखा।कुछ लोग ये भी कह रहे है की हर किसी ने तो बयां नहीं दिया। उन पाकिस्तानी कलाकारों से किसी ने इस बारे में पूछा ही नहीं तो मैं आपको बता दूं कि एस्सेल ग्रुप के चेयरमैन ने उन सभी कलाकारों को स्वयं फ़ोन करके कहा था कि आप बिना पाकिस्तान का नाम लिए उरी हमलो की निंदा करें लेकिन किसी ने एक लफ्ज़ भी नहीं कहा।और सलमान खान जैसे लोग जो पाकिसतानी कलाकारों का समर्थन कर रहे है उन लोगों ने कभी ये सोचा है कि उन आर्मी वालों का मन नहीं करता होगा एक नॉर्मल ज़िन्दगी जीने का जिसमे वो अपने परिवार के साथ रहे जहाँ उनको जान का खतरा न हो क्या उस माँ को अच्छा लगता होगा अपने बेटे को मौत के मुह में जाते देख वो सैनिक अपनी जान दाव् पर लगाकर उन लोगो के लिए सीमा पर खड़ा रहता है जिनको उनकी कदर ही नहीं है जैसे ॐ पूरी साहब ।आप सबको उनका बयान तो पता ही होगा ।क्या सलमान खान जैसे लोगो ने कभी ये सोचा है कि जब एक सैनिक बॉर्डर पर रहता है तोह ऐसा नहीं है की उसकी दोस्ती या बातचीत दूसरी तरफ वाले सैनिक से नहीं होती*ये बात खुद एक सैनिक ने कुबूली है* लेकिन फिर भी जब सरकार के तरफ से ऑर्डर्स आते हैं तो वो सैनिक सब कुछ भूलकर अपने देश की खातिर लड़ता भी है और अपनी जान भी दे देता है।उस सैनिक को यह सुनके कैसा लगता होगा कि जिस देश के खिलाफ वो और उसके साथी लड़कर अपनी जान गवा रहें हैं  उसी देश के कलाकारों के समर्थन में अपने देश के लोग खरे हो।नाना पाटेकर जी ने यह बात बिलकुल सही कही की कलाकार देश के सामने बड़ा ही छोटा खटमल जैसा है उसकी बातों पर ध्यान न दे वहीँ कुछ के लिए देश से बढ़कर कलाकार है।हाल ही में बारामुला में एक और जवान शहीद हो गए।जो की सिर्फ 24 साल के थे।क्या गलती थी उनकी की उन्होंने अपने जीवन को देश के नाम कर दिया और अपना घर, अपना गांव, अपना सब कुछ छोर कर देश की सेवा में लग गए और देश के लिए यह दुनिया सिर्फ 24 साल की उम्र में छोर के चले गए। चाहते तो वह भी एक बड़ी कंपनी में जॉब कर कर अपनी ज़िन्दगी अपने परिवार के साथ बीता सकते थे लेकिन उन्होंने ऐसा नहि किया क्योंकि उनके लिए उनके देश से बढ़कर कुछ भी नहीं और कुछ केलिए देश से बढ़कर कला है। सर्जिकल स्ट्राइक्स करके हमारे देश ने जो सहस दिखाया है उसकी सरहना तोह बाकी मुल्क भी कर रहें हैं और इस बात पर हमें गर्व होना चाहिए की हमारे देश के वीर और  बहादुर सैनिकों ने आतंकवादियो के 8 कैंप भी नष्ट की और उनमें से एक को भी कुछ नहीं हुआ बजाये की सुर्गीकाल स्ट्राइक्स के सुबूत मांगने के।

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